सौर ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की दौड़ लगाने वाली है दिल्ली मेट्रो, पहले शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

मजेंटा लाइन कॉरिडोर के आसपास लगाए जाएंगे सौलर पैनल, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगी परियोजना। इस कॉरिडोर पर परियोजना की सफलता के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) नेटवर्क के दूसरे कॉरिडोर पर भी सोलर पैनल लगाए जाएंगे।

दिल्ली मेट्रो रेलवे ट्रैक से महज चंद मीटर की दूरी पर अब सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। सूर्य की अधिक से अधिक रोशनी को प्राप्त कर सौर ऊर्जा उत्पादन में आगे बढ़ने के लिए जामिया-ओखला विहार कॉरिडोर पर पायलट परियोजना शुरू होने जा रही है।

इसके तहत ट्रैक के नजदीक सोलर पैनल इस तरह लगाए जाएंगे कि अधिकतम रोशनी से सौर ऊर्जा का हासिल की जा सके। इस कॉरिडोर पर परियोजना की सफलता के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) नेटवर्क के दूसरे कॉरिडोर पर भी सोलर पैनल लगाए जाएंगे। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए दिल्ली मेट्रो ने कदम बढ़ाया है।

इसके तहत मजेंटा लाइन पर जामिया से ओखला के बीच के कॉरिडोर पर सोलर पैनल (पीवी मॉड्यूल) लगाए जाएंगे। इससे मिलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल स्टेशनों पर रोशनी सहित परिचालन में भी किया जाएगा। सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि के लिए रूफटॉप के बाद पहली बार मेट्रो लाइन के आसपास पैनल लगाए जाएंगे। इससे करीब 100 किलोवाट सौर ऊर्जा की प्राप्ति होगी।

डीएमआरसी ने 25 साल की अवधि के लिए सौर ऊर्जा के दोहन के लिए पायलट आधार पर पीवी परियोजना की दिशा में पहल की है। इससे मिलने वाली ऊर्जा का मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर पर इस्तेमाल किया जाएगा। रेस्को मॉडल के तहत 100 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए जाएंगे। 25 साल की अवधि के लिए इसके परिचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी।

रात के तीन घंटे में लगाए जाएंगे पैनल : मेट्रो वायाडक्ट पर रेट्रोफिटिंग कर न्यूनतम बदलाव के साथ बाय-फेशियल (दोनों तरफ) सोलर पैनल लगाए जाएंगे। रात में वक्त मेट्रो सेवाएं बंद होने के बाद तीन घंटे में इस कार्य को पूरा किया जाएगा। इस काम को अंजाम देने के दौरान यह अहम होगा कि पायलट आधार पर लाइन के चयन के वक्त समय और लागत को प्रभावित हो सकता है। जामिया मिलिया से ओखला विहार मेट्रो सेक्शन की पहचान सोलर पीवी मॉड्यूल लगाए जाएंगे।

कम ऊंचाई की इमारतों वाले क्षेत्रों का चयन : पैनल लगाने के दौरान खासतौर पर कम ऊंचाई की इमारतों वाले क्षेत्र का चयन किया जाता है। सूर्य की रोशनी को पैनल तक पहुंचने में न्यूनतम बाधा हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। इस कॉरिडोर के चयन में शोर का विश्लेषण, कंपन और हवा के भार, रखरखाव और स्थापना की राह में संभावित मुश्किलों का अध्ययन करने के बाद कदम बढ़ाए जाएंगे।

साल के अंत तक 50 मेगावाट का लक्ष्य
पर्यावरण के लिहाज से डीएमआरसी ने अपनी सौर ऊर्जा के उत्पादन में बढ़ोतरी की कोशिशें तेज कर दी हैं। वर्तमान में करीब 47 मेगावाट के सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इसे साल के अंत तक 50 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। दिल्ली मेट्रो दुनिया का पहला रेल आधारित संगठन है, जिसने सौर ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कार्बन क्रेडिट का दावा किया है। फिलहाल मध्य प्रदेश के रीवा प्लांट से दिल्ली मेट्रो को करीब 100 मेगावाट सौर ऊर्जा की प्राप्ति हो रही है, जबकि शेष बिजली दूसरे राज्यों से मिल रही है।

रेस्को मॉडल से मिलेगी सौर ऊर्जा
रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी (रेस्को) मॉडल के तहत सरकारी भवनों की छत पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाने की शुरुआत की गई है। इस मॉडल के तहत सरकारी विभागों को कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी, लेकिन भवन की छत पर लगाए जाने वाले रूफटॉप सोलर प्लांट के लिए विभाग को अपनी जेब से कुछ खर्च भी नहीं करना होगा।

विस्तार

दिल्ली मेट्रो रेलवे ट्रैक से महज चंद मीटर की दूरी पर अब सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। सूर्य की अधिक से अधिक रोशनी को प्राप्त कर सौर ऊर्जा उत्पादन में आगे बढ़ने के लिए जामिया-ओखला विहार कॉरिडोर पर पायलट परियोजना शुरू होने जा रही है।

इसके तहत ट्रैक के नजदीक सोलर पैनल इस तरह लगाए जाएंगे कि अधिकतम रोशनी से सौर ऊर्जा का हासिल की जा सके। इस कॉरिडोर पर परियोजना की सफलता के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) नेटवर्क के दूसरे कॉरिडोर पर भी सोलर पैनल लगाए जाएंगे। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए दिल्ली मेट्रो ने कदम बढ़ाया है।

इसके तहत मजेंटा लाइन पर जामिया से ओखला के बीच के कॉरिडोर पर सोलर पैनल (पीवी मॉड्यूल) लगाए जाएंगे। इससे मिलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल स्टेशनों पर रोशनी सहित परिचालन में भी किया जाएगा। सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि के लिए रूफटॉप के बाद पहली बार मेट्रो लाइन के आसपास पैनल लगाए जाएंगे। इससे करीब 100 किलोवाट सौर ऊर्जा की प्राप्ति होगी।

डीएमआरसी ने 25 साल की अवधि के लिए सौर ऊर्जा के दोहन के लिए पायलट आधार पर पीवी परियोजना की दिशा में पहल की है। इससे मिलने वाली ऊर्जा का मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर पर इस्तेमाल किया जाएगा। रेस्को मॉडल के तहत 100 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए जाएंगे। 25 साल की अवधि के लिए इसके परिचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी।

रात के तीन घंटे में लगाए जाएंगे पैनल : मेट्रो वायाडक्ट पर रेट्रोफिटिंग कर न्यूनतम बदलाव के साथ बाय-फेशियल (दोनों तरफ) सोलर पैनल लगाए जाएंगे। रात में वक्त मेट्रो सेवाएं बंद होने के बाद तीन घंटे में इस कार्य को पूरा किया जाएगा। इस काम को अंजाम देने के दौरान यह अहम होगा कि पायलट आधार पर लाइन के चयन के वक्त समय और लागत को प्रभावित हो सकता है। जामिया मिलिया से ओखला विहार मेट्रो सेक्शन की पहचान सोलर पीवी मॉड्यूल लगाए जाएंगे।

कम ऊंचाई की इमारतों वाले क्षेत्रों का चयन : पैनल लगाने के दौरान खासतौर पर कम ऊंचाई की इमारतों वाले क्षेत्र का चयन किया जाता है। सूर्य की रोशनी को पैनल तक पहुंचने में न्यूनतम बाधा हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। इस कॉरिडोर के चयन में शोर का विश्लेषण, कंपन और हवा के भार, रखरखाव और स्थापना की राह में संभावित मुश्किलों का अध्ययन करने के बाद कदम बढ़ाए जाएंगे।

साल के अंत तक 50 मेगावाट का लक्ष्य

पर्यावरण के लिहाज से डीएमआरसी ने अपनी सौर ऊर्जा के उत्पादन में बढ़ोतरी की कोशिशें तेज कर दी हैं। वर्तमान में करीब 47 मेगावाट के सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इसे साल के अंत तक 50 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। दिल्ली मेट्रो दुनिया का पहला रेल आधारित संगठन है, जिसने सौर ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कार्बन क्रेडिट का दावा किया है। फिलहाल मध्य प्रदेश के रीवा प्लांट से दिल्ली मेट्रो को करीब 100 मेगावाट सौर ऊर्जा की प्राप्ति हो रही है, जबकि शेष बिजली दूसरे राज्यों से मिल रही है।

रेस्को मॉडल से मिलेगी सौर ऊर्जा

रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी (रेस्को) मॉडल के तहत सरकारी भवनों की छत पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाने की शुरुआत की गई है। इस मॉडल के तहत सरकारी विभागों को कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी, लेकिन भवन की छत पर लगाए जाने वाले रूफटॉप सोलर प्लांट के लिए विभाग को अपनी जेब से कुछ खर्च भी नहीं करना होगा।

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