दूसरों को इलेक्ट्रिक वाहन की नसीहत देने वाला प्रशासन खुद खरीद रहा पेट्रोल-डीजल वाहन, आरटीआई में खुलासा 

आरटीआई में आरएलए ने बताया कि उनके पास 3624 सरकारी गाड़ियां पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर गाड़ियां प्रशासन, नगर निगम समेत अन्य विभागों के अधिकारी, पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग व विभागों के कार्यों में लगी हुई हैं।

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन पिछले कई वर्षों से शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात कर रहा है लेकिन खुद पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीद रहा है। एक आरटीआई के जवाब में रजिस्टरिंग एवं लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) ने बताया है कि पिछले चार वर्ष में प्रशासन ने 1014 गाड़ियां खरीदीं हैं लेकिन इनमें इलेक्ट्रिक वाहन न के बराबर हैं।

आरटीआई में आरएलए ने बताया कि उनके पास 3624 सरकारी गाड़ियां पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर गाड़ियां प्रशासन, नगर निगम समेत अन्य विभागों के अधिकारी, पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग व विभागों के कार्यों में लगी हुई हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में बताया गया है कि वर्ष 2018 से 31 मार्च 2022 के बीच आरएलए में 1014 गाड़ियां पंजीकृत हुई हैं। ये सभी नई गाड़ियां हैं, जिन्हें विभिन्न कामों के लिए खरीदा गया था। इनमें से पेट्रोल की 551 और डीजल की 457 गाड़ियां हैं जबकि इस दौरान केवल छह इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत कराए गए। आरएलए ने बताया है कि उनके पास अब तक सिर्फ 12 सरकारी इलेक्ट्रिक वाहन ही पंजीकृत हुए हैं। ये स्थिति तब है, जब प्रशासन शहरवासियों को ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की नसीहत दे रहा है।

लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदे गिनाए जा रहे हैं लेकिन जब खुद की बारी आती है तो प्रशासन पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीदता है। प्रशासन जल्द ही एक इलेक्ट्रिक वाहन नीति भी लाने जा रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर लोगों को इंसेंटिव मिलेगा। पूरे शहर में चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं ताकि लोगों को गाड़ी खरीदने के बाद चार्ज करने में समस्या न आए।

कई राज्यों में सरकारी वाहनों को ईवी में बदला जा रहा

देश में कई राज्यों की सरकारों ने सरकारी बेड़े की गाड़ियों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना भी शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने एक जनवरी 2022 से इस पर काम शुरू कर दिया है। यहां की सरकार जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद व किराए पर ले रही है। दिल्ली सरकार लीज पर संचालित होने वाले मौजूदा वाहनों (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील कर रही है। चंडीगढ़ में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने सीएनजी ऑटो को परमिट देना बंद कर दिया है। अब सिर्फ ई-ऑटो को शहर में सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। साथ ही शहर में चल रहे करीब 6500 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है। यूटी प्रशासन का फोकस ई-बसों के साथ ई-टू व्हीलर और थ्री-व्हीलर पर भी है लेकिन सरकारी दफ्तरों में अभी भी वाहनों को ईवी में बदलना शुरू नहीं हुआ है।

विस्तार

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन पिछले कई वर्षों से शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात कर रहा है लेकिन खुद पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीद रहा है। एक आरटीआई के जवाब में रजिस्टरिंग एवं लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) ने बताया है कि पिछले चार वर्ष में प्रशासन ने 1014 गाड़ियां खरीदीं हैं लेकिन इनमें इलेक्ट्रिक वाहन न के बराबर हैं।

आरटीआई में आरएलए ने बताया कि उनके पास 3624 सरकारी गाड़ियां पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर गाड़ियां प्रशासन, नगर निगम समेत अन्य विभागों के अधिकारी, पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग व विभागों के कार्यों में लगी हुई हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में बताया गया है कि वर्ष 2018 से 31 मार्च 2022 के बीच आरएलए में 1014 गाड़ियां पंजीकृत हुई हैं। ये सभी नई गाड़ियां हैं, जिन्हें विभिन्न कामों के लिए खरीदा गया था। इनमें से पेट्रोल की 551 और डीजल की 457 गाड़ियां हैं जबकि इस दौरान केवल छह इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत कराए गए। आरएलए ने बताया है कि उनके पास अब तक सिर्फ 12 सरकारी इलेक्ट्रिक वाहन ही पंजीकृत हुए हैं। ये स्थिति तब है, जब प्रशासन शहरवासियों को ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की नसीहत दे रहा है।

लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदे गिनाए जा रहे हैं लेकिन जब खुद की बारी आती है तो प्रशासन पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीदता है। प्रशासन जल्द ही एक इलेक्ट्रिक वाहन नीति भी लाने जा रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर लोगों को इंसेंटिव मिलेगा। पूरे शहर में चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं ताकि लोगों को गाड़ी खरीदने के बाद चार्ज करने में समस्या न आए।

कई राज्यों में सरकारी वाहनों को ईवी में बदला जा रहा

देश में कई राज्यों की सरकारों ने सरकारी बेड़े की गाड़ियों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना भी शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने एक जनवरी 2022 से इस पर काम शुरू कर दिया है। यहां की सरकार जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद व किराए पर ले रही है। दिल्ली सरकार लीज पर संचालित होने वाले मौजूदा वाहनों (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील कर रही है। चंडीगढ़ में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने सीएनजी ऑटो को परमिट देना बंद कर दिया है। अब सिर्फ ई-ऑटो को शहर में सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। साथ ही शहर में चल रहे करीब 6500 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है। यूटी प्रशासन का फोकस ई-बसों के साथ ई-टू व्हीलर और थ्री-व्हीलर पर भी है लेकिन सरकारी दफ्तरों में अभी भी वाहनों को ईवी में बदलना शुरू नहीं हुआ है।

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